मात पिता से बढ़कर कोई,
दूजा गुरू नहीं जग में |
इनकी सेवा सुफल दायिनी,
ध्यान रखें जीवन-मग में ||
दूजा गुरू नहीं जग में |
इनकी सेवा सुफल दायिनी,
ध्यान रखें जीवन-मग में ||
कवितायेँ कहानियाँ और कुछ चेतावनियाँ... यथार्थ की कुछ बातें... डंके की चोट पर कुछ अलग कहना और लिखना.... जो समाज को दिशा दे और उसकी दशा भी बताये.....