Saturday, 4 April 2020

ज़िन्दगी

• लेती है इम्तिहान ज़िन्दगी,
   लगती है बेईमान ज़िन्दगी।
   कदम कदम पर ठिटक ठिटक कर,
   करती अति अभिमान ज़िन्दगी।।
 
• किसी किसी की खास ज़िन्दगी,
   किसी की बहुत उदास ज़िन्दगी।
   घर घर जाकर देखोगे     यदि,
   झेल रही उपहास जिन्दगी।।

• कहीं-कहीं गुमनाम जिंदगी,
  कहीं पै है बिन काम ज़िन्दगी।
  खरी कसौटी पर उतरी हो,
  फिर भी है बदनाम ज़िन्दगी।।

• प्रकृति का उपहार ज़िन्दगी,
   रहे उठाती भार ज़िन्दगी।
   दर दर ठोकर खा करके भी,
   जीवन का है सार ज़िन्दगी।।

•  नदिया जैसी धार ज़िन्दगी,
    जार और बेजार ज़िन्दगी।
    दे दे करके रोज़ इम्तिहां,
    बैठी खाकर मार ज़िन्दगी।।

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