माना कि आमंदनी दो गुनी है गई,
खर्चा भी दिन राति चौ गुने बढ़ि रहे |
घाटौ बहु काम में आगे ही आगे है,
कहानी गढ़न बारे नित नई गढ़ि रहे ||
दोषी निज दोष कूँ अपनों नां मानिकें,
सब के सब दोष इक दूजे पै मढ़ि रहे |
कारौ सौ चश्मा अँखियनु लगाइकें,
अन्धेरी राति में अखरनु कूँ पढ़ि रहे ||
खर्चा भी दिन राति चौ गुने बढ़ि रहे |
घाटौ बहु काम में आगे ही आगे है,
कहानी गढ़न बारे नित नई गढ़ि रहे ||
दोषी निज दोष कूँ अपनों नां मानिकें,
सब के सब दोष इक दूजे पै मढ़ि रहे |
कारौ सौ चश्मा अँखियनु लगाइकें,
अन्धेरी राति में अखरनु कूँ पढ़ि रहे ||
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