Friday, 29 June 2018

अन्तर

गरीबी अमीरी में 
ऐसौ का अन्तरु है, 
जानत भए हू जो,
जाहि नहिं जानत हैं |
मम पेटु हाऊ है 
मैं न जानूँ काहू है, 
धारना धरनहार,
अपनी ही तानत हैं ||
कोउ खातु भरि पेट
कोउ जातु मरि खेत , 
देखत हुए हू कछु , 
ताहि नहिं मानत हैं |
एकु सोतु धरती पै 
एकु वायुयान में ,
अन्तर के जानकार,
मनकी सी छानत हैं ||

Thursday, 28 June 2018

आजकल ?

साँच दुबकती फिर रही,
झूठ दिखै हर ठौर |
उलट बाँसियाँ बजि रहीं,
करै न कोई गौर ||
करै न कोई गौर,
नतीजे नहिं फलदायक |
झूठ रही फलि फूलि,
बनीं चहुँ दिसि खलनायक ||
सोचि समझि कछु लेहु,
फिज़ाएं दिखें सुबकती |
यहाँ वहाँ सब जगह,
फिरि रही साँच दुबकती ||

Monday, 25 June 2018

" शकूँ "

गरीब के करीब ही,
शकूँ की खान है,
अमीर तो बेचेन हमेशा रहा है |
इशारों इशारों में,
नाँच ये जाता है,
चुटकी बजत ही करता कहा है ||
नजरें उठाके,
देखेंगे गर हम,
इसके सर ऊपर से पानी बहा है |
खैर खबर लेवें,
नीती नियंता हू,
गंगा को गरीब भी लेगा नहा है ||

Wednesday, 20 June 2018

" चुभते तीर "

माना कि आमंदनी दो गुनी है गई,
खर्चा भी दिन राति चौ गुने बढ़ि रहे |
घाटौ बहु काम में आगे ही आगे है,
कहानी गढ़न बारे नित नई गढ़ि रहे ||
दोषी निज दोष कूँ अपनों नां मानिकें,
सब के सब दोष इक दूजे पै मढ़ि रहे |
कारौ सौ चश्मा अँखियनु लगाइकें,
अन्धेरी राति में अखरनु कूँ पढ़ि रहे ||

Tuesday, 5 June 2018

किसान की कसक

किसान की कसक कूँ,
कोई नहिं जानता है,
प्रकृति के भरोसे याकी नैया पार होति है |
घड़ियाली आँशू ,
बहाते सब दीखते,
बौहार निभाके छुड़ाते सब छोति है ||
लागति लगति जो,
खेती किसानी में,
पके बादि मिलति नाँहिं,
 बोहू जाहि खोति है |
नीतियाँ बनान बारे,
ए सी बैठि कहत,
भारत में किसान की,
बल्ले बल्ले होति है ||

Friday, 16 March 2018

" बेटी की दशा "

दहेज की खातिर मर रही है बेटी |
पैदा होने के लिए डर रही है बेटी ||
दूल्हा डंके की चोट बिक रहा है |
विरोध कहीं भी नहीं दिख रहा है ||
अधिजन भागे ही भागे जा रहे हैं |
लड़की वाले धोखा खा रहे हैं ||
कहीं लड़की छोटी पड़ रही है |
और कहीं लड़की मोटी पड़ रही है ||
कहीं नज़रें नजा़रे भाँप रहीं हैं |
कहीं फीता लेकर नाँप रहीं हैं ||
ज्ञान -चरित सब गौड़ हो गए |
जाने क्यों हम फ्रौड हो गए ||
अपनी माँ बेशक ठिगनीं हो |
बहन और दुहिता उतनीं हो |
पर -पर दुहिता लंबी चहिए |
इनसे कोई कुछ मत कहिए ||
डींग हाँकते जय हो बेटी |
रकम माँगते हैं भर पेटी ||
छोरा ते छोरी हो गोरी |
और शक्ल की भी हो भोरी ||
लला भलें कदुआ दंसइया |
फिर वो है कुँवर कन्हैया ||
शर्म करहु बिनु बुद्धी बारे |
दिन में दिखा रहे तुम तारे ||
लड़की बारे रोइ रहे हैं |
अपना साहस खोइ रहे हैं ||
बिन दहेज नहिं ब्याह हो रहे |
अधिजन काले सियाह हो रहे ||
दया करहु अरु हया बिसारौ |
मानहुँ हों ऐहसान तिहारौ ||
दहेज लोलुप जो सज्जन हैं |
मम विचार से वो अधिजन हैं ||
चहहि अकेला नाँहि "अकेला "|
सदाचरण का लगिहे मेला ||
बैठि गेह बेटी सिसकेगी |
जन्म लैन में वो हिचकेगी ||

Tuesday, 27 February 2018

होली के रंग

होली के रँग फीके पड़ि गए, आँगें थे वे आँगे बढ़ि गए |
पाँछे थे ते पाँछें रहि गए, तौ का पुरिखा ऐसी कहि गए ||
मूक बने देखत रहियौ, रूख बने टेकत रहियौ |
लिपे -लिपे प्रतिकार करौ,  प्राप्य सबहिं अधिकार धरौ ||
अजहूँ तुहरीं कँह फूटि गईं, क्यूँ लछिमी तुमसों रूठि रहीं |
जब अलग अलग ढप बाजैगौ, तौ कोई कामु न छाजैगौ ||
मिलि झाँझ मृदंग बजाऔ जी, महफिल कूँ खूब सजाऔ जी |
जागरूकता लानी है, होली पवित मनानी है ||
अनचाही फिजां रोकनी है ,नव कील सदां ठोकनी है |
यह भारत देश अनोखा है, सारी दुनियाँ से चोखा है ||
अकबर सिंह अकेला की, अरु होली के मेला की |
अब धूम मचैगी गरमिन तक, कहुँ गोरी कहुँ छैला की ||

Monday, 26 February 2018

होली

नया नहीं कुछ होने वाला, रोज मनाओ होली को |
पहले करो सुरक्षित अपनी, कटने वाली झोली को ||
नया तराना, नया जमाना |नया डराना, नया कमाना ||
नया सलीका, नया तरीका | नया पलीता, नया सरीखा ||
नई बुराई, नई खुमारी |ऐसी तैसी, करी तुम्हारी||
लगता है क्या, आज हो गया | अपनों का मोहताज हो गया ||
चारों ओर अंधेरा छाया |उसका छोर कहीं नहिं पाया ||
बड़े बड़ों की मौज हो रही |पड़वा में भी दौज हो रही ||
छोटे छोटे तरस रहे हैं |बादल भी नहिं बरस रहे हैं ||
बड़े करहिं वो सब कुछ लीला |छोटा करिअहि तो गुड़ गीला ||
गंग आज उलटी बहि रहिहैं |असल बात कोऊ नहिं कहिहैं ||
जो कहुँ साँच बखानन चहिहौ |तौ तुम दूर देश कों रहिहौ ||
चहै न चढ़ि गै अटा अटारी | पातर रहि गै भौत पिछारी ||

Saturday, 30 September 2017

"रावन"


रावन का पुतला दहन, करहिं आज जो लोग।ऐसा करिअहिं उहि सभी, बढ़ा रहहिं इक रोग।।बढ़ा रहहिं इक रोग,नाम उसका परदूषन।रावन हुइहै राख, खाक नहिं हुइ खरदूषन।।कहै" अकेला" आज,ह्वै रहे सभी अपावन।उहि रावन मुइ गयो, मुए नहिं आज के" रावन"।।~ अकबर सिंह " अकेला"

Thursday, 22 September 2016

अनदेखी मत करो

•शुरूआती मर्ज की |
   बैंक के कर्ज की ||
    व्यापार में हर्ज की |||
      अनदेखी ............(1)
 • बेटा और बाप की |
    घर आए  साँप की ||
      दर्जी के नाँप की  |||
         अनदेखी .........(2)
• फागुन की होरी की |
   पतंग की डोरी की  ||
      छोरा और छोरी की |||
        अनदेखी ..........(3)
• आधुनिक चाह की |
   सन्तान के ब्याह की ||
      निर्बल की आह की |||
        अनदेखी ..........(4)
• कुल के कुलभूषन की |
    बढ़ते परदूषन  की ||
     त्रिफल्ला चूरन की |||
       अनदेखी ......... (5)
• दुश्मन की ताकत की |
    प्रेमी की नजाकत की ||
      किसी भी बगावत की|||
       अनदेखी .........(6)
• लतकने घोड़ा की |
   अधपके फोड़ा की ||
     राजशाही कोड़ा की |||
       अनदेखी .........(7)
• फर्जी बसीयत की |
    थुक्का फजीहत की ||
      मजहवी शरीयत की |||
        अनदेखी .........(9)
• शाम के दीया की |
   घर आए पिया की ||
     तोरई घीया की  |||
       अनदेखी ........(10)
• देश के जवान की |
   और हर किसान की ||
      भारत महान की  |||
        अनदेखी .......(11)
• कोयल की कूक की |
   गरीब की भूख की ||
    भूल अरु चूक की |||
      अनदेखी .......(12)
• सूखी सी पोखर की |
   स्वाँग के जोकर की ||
     बूढ़े से  डोकर की |||
       अनदेखी .........(13)
• शिक्षक समाज की |
    कल और आज की ||
     अच्छे राज काज की |||
          अनदेखी .........(14)
• धन के कुबेर की |
   पर्वत सुमेर की  ||
     ड्यूटी पै देर की |||
       अनदेखी .......(15)
• नाग के नथैया की |
  बलदाऊ भैया की ||
   जसुदा सी मैया की |||
     अनदेखी .........(16)

Tuesday, 28 June 2011

आंकिक-सन्देश

एक,                                                                                 
चित्र: साभार गूगल
कुछ आगे पीछे देख |
दो,
दुःख में  ना तू रो |
 तीन,
बजा शांति का बीन |
चार,
तेरे प्रेमी  और दुश्मन हजार |
पांच,
करले उनकी जाँच |
छह,
मत करना तू भय |
सात,
क्यों मलता रे हाथ ?
आठ,
मत हो बारहबाट |
नौ,
तेरी कब पड़ेगी पौ ?
दस,
तू धैर्य - कूप में धस |
"अकबर" डुबकी ले तू हंसकर ...... 

Monday, 15 May 2006

महेन्द्र सिंह धोनी

अनहोनी को होनी कर दे, होनी को अनहोनी |
रोशन नाम किया भारत का, उसका नाम है धोनी ||

(1) बैटिंग करता कभी न डरता,
      गैंदबाज की सब गैंदों पर,
      मार- मार कर भूसा भरता |
      चाहे स्पिन चाहे तेज,
      कर दे सबको वह निस्तेज ||
      हर क्रिकेटर की कद काँठी,
      कर दी जिसने बौनी ||
      रोशन नाम ••••••••••••••

(2) चाहे जिस नम्बर पर खेले,
      होकर निडर बिना चिन्ता के,
      जब चाहे तब ही रन ले ले |
      इक्का मारे दुक्का मारे,
      तिक्का चौका छक्का मारे |
      देख विपक्षी पिच पर उसको,
      बन जाते हैं मौनी ||
      रोशन नाम ••••••••••••••

(3) विकेेट के पीछे खड़ा रहे वो |
      शुरू से लेकर अन्त समय तक,
      समर भूमि में अड़ा रहे वो ||
      लम्ब नासिका लम्बी चाल,
      पिच पर रहे ठोकता ताल |
      वीर भूमि का वीर खिलाड़ी,
      करे न टोना टोनी |
      रोशन नाम •••••••••••••

(4) दर्शक देखि मगन हों भारी,
     हार और व्यवहार अनौखा,
     दुश्मन भी हैं पीटें तारी |
     चपल चतुरता दीखे हर छन,
     कुण्ठा कभी न लाता निज मन |
     पीता दूध अकेला वो तो,
     खाता ताजा लौनी ||
     रोशन नाम •••••••••••••

अनहोनी को होनी कर दे, होनी को अनहोनी |
रोशन नाम किया भारत का, उसका नाम है धोनी ||