१.लाइलाज़ यह रोग भयानक,
बिगड़ गए सब कथे कथानक।
गणित गड़बड़ा गया सभी का,
घुसा देश मेंआइ अचानक ।।
२. भारत सहित विश्व है हतप्रद,
पार करी कोरोना हर हद ।
चाक और चौबन्द व्यवस्था,
तऊ बढ़ रहा है इसका कद।।
३.साहस सहित बचाव करें हम,
इक दूजे से नहींं डरें हम।
मीटर एक बना कर दूरी,
परा आप संताप हरें हम।।
४. घर में रहें मानि अनुशासन,
एक अकेला का करि शासन।
बिना जरूरत के ना घूमें,
हल्का फुल्का खाओ राशन।।
५.स्वच्छ रहो अरु मस्त रहो सब,
धीरे-धीरे व्यस्त रहो सब,
लॉकडाउनी संरचना में ,
घर अन्दर अभ्यस्त रहो सब।।
६.मास्क पहन सामग्री लाएं,
साफ सफाई करि पकवाएं।
वस्त्र धोइ अरु स्नान करो जी,
तदुपरान्त सब भोजन खाएं।।
७.संयम नियम सभी अपनावें,
लोक शोक को धरम बनावें।
मरम भाव से घाव भरेंगे ,
सरल सनेह सदा बरसावें।।
८.कोरोना का खतरा भारी,
बिन मारे की मारा मारी।
अखिल विश्व इसकी चपेट में,
पारंम्परिक चिकित्सा हारी।।
९.पुनि पुनि आशा आवहु पासा,
छोड़ि छांड़ि नव अनिछ निराशा।
अपितु नांहि तो परहि उठाना,
अति नुकसान अपरिमित खासा।।
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बिगड़ गए सब कथे कथानक।
गणित गड़बड़ा गया सभी का,
घुसा देश मेंआइ अचानक ।।
२. भारत सहित विश्व है हतप्रद,
पार करी कोरोना हर हद ।
चाक और चौबन्द व्यवस्था,
तऊ बढ़ रहा है इसका कद।।
३.साहस सहित बचाव करें हम,
इक दूजे से नहींं डरें हम।
मीटर एक बना कर दूरी,
परा आप संताप हरें हम।।
४. घर में रहें मानि अनुशासन,
एक अकेला का करि शासन।
बिना जरूरत के ना घूमें,
हल्का फुल्का खाओ राशन।।
५.स्वच्छ रहो अरु मस्त रहो सब,
धीरे-धीरे व्यस्त रहो सब,
लॉकडाउनी संरचना में ,
घर अन्दर अभ्यस्त रहो सब।।
६.मास्क पहन सामग्री लाएं,
साफ सफाई करि पकवाएं।
वस्त्र धोइ अरु स्नान करो जी,
तदुपरान्त सब भोजन खाएं।।
७.संयम नियम सभी अपनावें,
लोक शोक को धरम बनावें।
मरम भाव से घाव भरेंगे ,
सरल सनेह सदा बरसावें।।
८.कोरोना का खतरा भारी,
बिन मारे की मारा मारी।
अखिल विश्व इसकी चपेट में,
पारंम्परिक चिकित्सा हारी।।
९.पुनि पुनि आशा आवहु पासा,
छोड़ि छांड़ि नव अनिछ निराशा।
अपितु नांहि तो परहि उठाना,
अति नुकसान अपरिमित खासा।।
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बहुत खूब अकबर सिंह जी
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