Saturday, 28 March 2020

हमने देखे

1. खेत लहलहे गेहूं जौ के,
    नोट पुराने चलते सौ के।
    बछरी बछरा कूदत फांदत,
    नन्द नंदन वो माता गौ के।।
                        हमने *

2.चना मटर औ सरसों दूंआं,
   आग लगे पर निकले धूंआं।
   प्यासे पथिक भटकते फिरते,
   मिलें कहां पानी के कूंआं।।
                       हमने*

3.गाजर मूली मैथी पालक,
    गली गिरारे खेलत बालक।
    सैन मटक्का चोर उचक्के,
    रैन अंधेरी के घर घालक।।
                        हमने*

4.हर किसान के खेतहिं आलू,
   चरखा खूब चलाते भालू।
   स्वांग तमासे के वो जोकर,
   होते थे जो बेहद चालू ।।
                     हमने*

5.खेतऔर खलिहान किसानू,
   बरखा ॠतु के विविध विषानू।
   गौचारन के समय शाम को,
   विचरन करते फिरहिं विहानूं।
                            हमने*

6.भादों ज्वार बाजरा मक्का,
     दाएं बाएं बुढ़रू कक्का ।
     नामे बैल खड़ी गाड़ी में,
     लोग मारते झुककर धक्का।।
                     हमने*

7. शीतकाल की लम्बी रातें,
     बाबा दादी की बहु बातें,
     दुहत दूध काढ़न बारिनु में,
     अनचाहे पड़ती थीं लातें।।
                        हमने*

8. फागुन मास हुरारी होरीं,
    कहूं बहुत कहुं थोरीं थोरीं।
    मांटी धूरि गुबरिया कीचड़,
    गिरत शराबी मोरीं मोरीं ।।
                      हमने*

9. गांव गांव में लगते दंगल,
    गीत मीत मन भाउन मंगल,
    यत्र तत्र सर्वत्र खड़े थे,
    हरे भरे मनचंगी जंगल।।
                       हमने*

Thursday, 26 March 2020

कोरोना

१.लाइलाज़ यह रोग भयानक,
   बिगड़ गए सब कथे कथानक।
   गणित गड़बड़ा गया सभी का,
   घुसा देश मेंआइ अचानक ।।

२. भारत सहित विश्व है हतप्रद,
    पार करी कोरोना हर हद ।
    चाक और चौबन्द व्यवस्था,
    तऊ बढ़ रहा है इसका कद।।

३.साहस सहित बचाव करें हम,
   इक दूजे से नहींं डरें    हम।
   मीटर एक बना कर दूरी,
    परा आप संताप हरें हम।।

४. घर में रहें मानि अनुशासन,
    एक अकेला का करि शासन।
    बिना जरूरत के ना घूमें,
     हल्का फुल्का खाओ राशन।।

५.स्वच्छ रहो अरु मस्त रहो सब,
    धीरे-धीरे व्यस्त रहो सब,
    लॉकडाउनी संरचना में ,
     घर अन्दर अभ्यस्त रहो सब।।

६.मास्क पहन सामग्री लाएं,
   साफ सफाई करि पकवाएं।
   वस्त्र धोइ अरु स्नान करो जी,
   तदुपरान्त सब भोजन खाएं।।

७.संयम नियम सभी अपनावें,
    लोक शोक को धरम बनावें।
     मरम भाव से घाव भरेंगे ,
     सरल सनेह सदा बरसावें।।

८.कोरोना का खतरा भारी,
    बिन मारे की मारा मारी।
    अखिल विश्व इसकी चपेट में,
    पारंम्परिक चिकित्सा हारी।।

९.पुनि पुनि आशा आवहु पासा,
    छोड़ि छांड़ि नव अनिछ निराशा।
    अपितु नांहि तो परहि उठाना,
    अति नुकसान अपरिमित खासा।।

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Wednesday, 25 March 2020

छेड़-छाड़

जब जब प्रकृति सों
छेड़-छाड़ होवहीं।
      तब तब अपना वो
      मूल भाव खोवहीं।।
गेह गांव प्रदेश देश
छांड़ि कहं कढ़ि जहीं।
      परदूषन पर-दूखन
      भार प्रसार बढ़िअहीं।।
वन वृक्ष काटि कैं
कष्ट भ्रष्ट प्रदत्तहीं।
      सोच पोच लोच ना
       अग्रमे प्रमत्तहीं ।।
नद्य नीर क्षीर सम
विषम भाव राखहीं।
        नेति नेमि नष्ट भुवि
        नीरसास भाखहीं।।
अपथ सत पगपथी
असत मत फलित ज्वै।
       कर्मशील शीतलै
      अकर्मशील ज्वलित ह्वै।।
जहं चहै उहं नहींं
मोदिनी धारना ।
       श्रमपुंजनूं करहु
       मनामंजु वारना।।

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