(1) लुटतेआए सब इहाँ, जीवन में इक बार |
जो जग माँही नां लुटा, जानि न पाया सार ||
(2) कछु ऐसे कहि देत जो,कछु नहिं करें बखान |
प्रथमहिं दुखिया दीन के, दूजहिं देव समान ||
(3) पतित पावनी लालसा, फँसिअ पहर के बीच |
पिसि पिसि जैहैं अस्थियाँ,हों चहुँ सरिस दधीच ||
(4) प्राननु प्रिय जुहि जीविका,जुआ खेलतहिं जाइ |
समझौता करनों परै, पग-पग धोख्यौ खाइ ||
(5) पारंगत पर प्रीति में, कथित पवित करि खेल |
कूटरचित फन्दा कसें, अस्थाई जुरि मेल ||
(6) उर टूटहि मन दुखित भुँइं, खुँइं खुँइं जैहै नेह |
पुनि पुनि जिअरा खोजिअहि, सगुन शकुन कौ गेह||
(7) बिन बतियाँ बीतहिं दिवस, रतियाँ रति जग माहिं |
तिल तिल पजरहि जिअरवा, मनवा माँगहि छाँहि ||
(8) भों-भों भँवरा भ्रमर करि, करि पूरौ निज काल |
बिन जुगलहिं ह्वै सब अहैं, हाल इहाँ बेहाल ||
(9) वाकी बाँकी नजरिया, बाकी बच्यौ न भाव |
लगता है अब पलटिअहु, बीच भँवर महिं नाव ||
(10) हारें हरि सुमिरन करहिं, मुइ मुइ जैहै मोह |
झेलन सों वो ना झिलहि, उँह उहि छोह विछोह ||
(11) बैठि जांइ मनु मारि कँह, बस परबस सब जानि |
थिर करि यापन निमितियाँ, जीवन ह्वै रस खानि||
जो जग माँही नां लुटा, जानि न पाया सार ||
(2) कछु ऐसे कहि देत जो,कछु नहिं करें बखान |
प्रथमहिं दुखिया दीन के, दूजहिं देव समान ||
(3) पतित पावनी लालसा, फँसिअ पहर के बीच |
पिसि पिसि जैहैं अस्थियाँ,हों चहुँ सरिस दधीच ||
(4) प्राननु प्रिय जुहि जीविका,जुआ खेलतहिं जाइ |
समझौता करनों परै, पग-पग धोख्यौ खाइ ||
(5) पारंगत पर प्रीति में, कथित पवित करि खेल |
कूटरचित फन्दा कसें, अस्थाई जुरि मेल ||
(6) उर टूटहि मन दुखित भुँइं, खुँइं खुँइं जैहै नेह |
पुनि पुनि जिअरा खोजिअहि, सगुन शकुन कौ गेह||
(7) बिन बतियाँ बीतहिं दिवस, रतियाँ रति जग माहिं |
तिल तिल पजरहि जिअरवा, मनवा माँगहि छाँहि ||
(8) भों-भों भँवरा भ्रमर करि, करि पूरौ निज काल |
बिन जुगलहिं ह्वै सब अहैं, हाल इहाँ बेहाल ||
(9) वाकी बाँकी नजरिया, बाकी बच्यौ न भाव |
लगता है अब पलटिअहु, बीच भँवर महिं नाव ||
(10) हारें हरि सुमिरन करहिं, मुइ मुइ जैहै मोह |
झेलन सों वो ना झिलहि, उँह उहि छोह विछोह ||
(11) बैठि जांइ मनु मारि कँह, बस परबस सब जानि |
थिर करि यापन निमितियाँ, जीवन ह्वै रस खानि||
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